kalyug kab khatam hoga कलियुग का अंत

पुराणों के अनुसार जानिए कलियुग का अंत कब और कैसे होगा | Kalyug Kab Khatam Hoga

कलयुग जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वर्तमान युग को कलियुग के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार, चार युग हैं – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। प्रत्येक युग का समय निश्चित होता है, जब युग का समय पूरा हो जाता है, तब युग का परिवर्तन होता है। युग परिवर्तन के अनुसार युग के अनुसार सब कुछ बदलता है, मनुष्य की आयु और उनका विकास बदलता है और सभी जीव उम्र के अनुसार बदलते हैं। तो आज हम बात करेंगे उस युग के बारे में जो अभी चल रहा है, कलियुग का समय समाप्त होने पर इसका अंत कैसे होगा, तो आइए जानते हैं। 

कलियुग की आयु हिन्दू धर्म और पुराणों के अनुसार कलियुग की आयु 432000 वर्ष बताई गई है। हर युग में पाप बढ़ने पर इस युग की आयु समय अनुपात 4:3:2:1 से घटती रहती है। पहला युग सतयुग है, जिसकी आयु 1728000 वर्ष है, फिर त्रेतायुग आता है, जिसकी आयु 1296000 हजार वर्ष है, उसके बाद द्वापरयुग आता है जिसकी आयु 864000 वर्ष है, और अब यह कलियुग में चल रहा है जिसकी आयु 432000 वर्ष है। और अब केवल कलियुग का पहला चरण चल रहा है जिसे 2016 तक 5000 वर्ष बीत चुके हैं।(Kalyug Kab Khatam Hoga) कलियुग के खत्म होने में अभी काफी समय बाकी है। पुराणों में कलियुग के अंत और अंतिम चरण का उल्लेख कैसे होगा, तो आइए जानते हैं।

घोर कलयुग कब आएगा। पुराणों के अनुसार कलयुग का अंतिम चरण कैसे होगा 

हम सभी जानते हैं कि वर्तमान युग को कलियुग के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार, चार युग हैं सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। इन चारो योगो में कलयुग की आयु सबसे अधिक है और हिन्दू शास्त्र के अनुसार कलयुग की आयु 4,32,000 तक है और वर्तमान 5022 साल तक पूर्ण हुई आप अनुमान लगा 

सकते है अभी और कितने वर्ष बाकि है।  

अब आपके भी मन में ये सवाल आ रहा होगा की घोर कलयुग कब आएगा

इसके लिए आपको विस्तार से बताएंगे घोर कलयुग वेदों के अनुसार कलयुग समाप्त होने के बाद ही आएगा लेकिन उसकी आयु बहुत ही कम दिन के लिए होगी धर्म ग्रंथो कहां गया कि कलयुग के अंत में धरती पर इतनी बाप होने लगेंगे कि इंसान आपस में ही लड़ झगड़ के जीवन व्यतीत करेंगे । इस धरती पर उस समय भगवान की कोई अस्तित्व नहीं रहेंगे । इंसान सब अपने-अपने मतलब से रहेंगे । इंसान किसी भी प्राणी को मदद नहीं करेंगे सिर्फ अपने के लिए सोचेगा इस धरती पर बिल्कुल भी परमात्मा का वास नहीं होगा । उस समय भगवान की कोई पूजा – आराधना करने के लिए नहीं होगा । बस भटकते हुए आत्मा इस धरती पर रह जाएंगे।  पापों की कागार इतनी भर जाएंगे कि आने वाले समय में इंसान इंसान के मांस खाएंगे । 

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कलियुग के अंत में हत्या, चोरी, बलात्कार, ब्लैकमेल सबसे अधिक होने की संभावना है, जिससे पृथ्वी का रंग बदल जाएगा। क्योंकि उस समय मनुष्य एक दूसरे के खून के प्यासे होंगे, उस समय इस धरती पर मानव रक्त बहेगा।

कलियुग के अंत में मनुष्य की मनोदशा इतनी खराब होगी कि एक पिता अपने पुत्र को नहीं पहचान पाएगा और न ही पुत्र अपने पिता को पहचान पाएगा। पिता की मृत्यु के बाद पुत्र श्राद्ध भी नहीं करेंगे, पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी नहीं करेंगे। उस समय मनुष्य में धर्म का ज्ञान पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और उसके बाद ही कलियुग का अंत होगा।

कलियुग के अंत के बाद पापों की सीमा इतनी बढ़ जाएगी कि भगवान विष्णु स्वयं कल्कि अवतार लेंगे और सभी पापियों का संहार करेंगे। शास्त्रों के अनुसार कहा गया है कि 3 दिनों के भीतर भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और सारे संसार के पापियों का नाश करेंगे और फिर सभी अधर्म का नाश करेंगे, उसके बाद एक नए युग की शुरुआत होगी। जिस तीन दिन भगवान विष्णु कल्कि अवतार से संघर्ष करेंगे, उस दिन को घोर कलियुग कहा जाएगा, इसे पापों के निवारण का दिन कहा जाएगा, इसे अधर्म के विनाश का दिन कहा जाएगा।

कलयुग का अंत होने से पहले क्या – क्या घटाएँ होंगी 

कलियुग के अंत से पहले हमें कई संकेत मिलने लगेंगे। यह हमें पुराणों और शास्त्रों में बताया गया है। पुराणों की मानें तो कलियुग में पाप अपने चरम पर होगा, लोग एक-दूसरे पर अत्याचार करेंगे, सभी देश आपस में लड़ने को तैयार होंगे, एक-दूसरे की जमीन पर कब्जा होगा, इंसानों के साथ-साथ जानवरों पर भी अत्याचार होगा। वातावरण पूरी तरह प्रदूषित हो जाएगा, धरती रहने लायक नहीं रहेगी, पानी पीने लायक नहीं रहेगा, खाने को भी कुछ नहीं रहेगा, ऐसे में इंसान एक-दूसरे का खून पीएगा, लालच चरम पर होगा. कोई किसी के क़रीब न होगा, बाप-बेटा और बेटा बाप को मार डालेगा, कोई औरतों की इज्जत नहीं करेगा, सब लोग पैसे के पीछे भागेंगे, दुनिया में हाहाकार मचेगा। हर तरफ़ा आतंक फैला होगा।  लोग एक दूसरे पर अत्याचार करेंगे। हत्या करेंगे लूटपाट करेंगे हर तरफ पाप ही पाप होगा। अब आपके भी मन में भी ये सवाल आ रहा होगा की कलयुग का अंत कब होगा, आइये इसके बारे में भी जानते है 

कलयुग का अंत कब होगा या कलयुग कब समाप्त होगा 

‘ब्रह्म-वैवर्त पुराण’ में, भगवान कृष्ण कहते हैं कि कलियुग अपनी शुरुआत के 5,000 साल के बाद समाप्त होगा और उसके बाद स्वर्णिम युग आएगा।

शास्त्रों के अनुसार समय अवधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसके अनुसार हमारे पितरों का एक दिन और एक रात मनुष्य के 1 महीने के बराबर है। वहीं देवताओं का एक दिन और रात मनुष्य के एक वर्ष के बराबर होता है। इसी प्रकार देवताओं का एक मास मनुष्य के 30 वर्ष के बराबर और देवताओं का एक वर्ष मनुष्य के 360 वर्ष के बराबर होता है। शास्त्रों के अनुसार कलियुग 4,32,000 वर्ष का होता है जिसमें 4,27,000 वर्ष बचे रह जाते हैं। जैसे-जैसे कलियुग का अंत और करीब आने लगेगा वैसे – वैसे  मानव जाति का अंत होना शुरू होने लगेगा । लोग आपस में दुश्मनी करने लगेंगे और एक दूसरे को मारने लगेंगे। कलियुग के अंत तक मनुष्य की आयु केवल 13 वर्ष होगी और उसकी लंबाई केवल 4 इंच होगी।

जानिए कलयुग के अंत बाद क्या क्या होगा

पुराणों  के अनुसार जब कलयुग का पूरी तरह से अंत हो जायेगा तब धरती पर जीवन की एक नयी शुरुआत होगी। प्रकति फिर से धीरे – धीरे पूरी धरती पर फ़ैल जाएगी।  इंसान फिर से धरती पर जन्म लेगा और एक ने युग की शुरुआत होगी।  इस नए युग में न तो कोई पाप होगा और न ही कोई पापी होगा। सभी इंसान मिलकर रहेंगे और सात्विक जीवन जिएंगे। सब लोग भगवन का समरण करेंगे और एक दूसरे की भली करेंगे।  

सतयुग की अवधि 17 लाख 28 हजार वर्ष होगी और इस युग में मनुष्यों की आयु 4000 से 10000 वर्ष हो जायगी। चारो तरफ धर्म का साम्राज्य बढ़ जाएगा पृथवी पर एक बार फिर से धर्म का फिर से बोल बाला होगा। लोगो के मन में एक दूसरे के लिए नफरत नहीं होगी हर तरफ लोगो के मन में एक दूसरे के पररि प्रेम और साद भावना होगी। मानवता की पुनः स्थापना होगी और मनुस्य को पराम ज्ञान की प्राप्ति होगी इंसान भौतिक सुख के जगह मानसिक सुख पर ध्यान देंगे। पूजा पाठ व कर्मकांड में विश्वास करने लगेंगे। 

सतयुग में इंसान अपने तपोबल से इस्वर की प्राप्ति कर सकेगा व भगवन से बात कर सकेगा। इस युग में मनुस्य का अपने शरीर पर पूर्ण नियंत्राण होगा। मनुष्य मात्र आत्मा के परमात्मा से मिलान से सुखी होगा। सतयुग को सृष्टि का स्वर्णयुग कहा जाएगा।

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